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जय मां जय जय मां ...................

                               जय मां जय जय मां ...................

 

 

कौन कहता है मां की ज्योत नही बोलती , श्रद्धा से इसको बुलाने वाला चाहिए
ज्योत से ज्योत को मिलाने वाला चाहिए ।
भावना से इसको पुकार के तो देखिये अंखियो के शीशे में उतार के तो देखिये ,
सच की आवाज में आवाज ये मिलायेगी , सोया जो तु नींद मे , है तुझको जगायेगी ।
तेरा इसके चरणो मे ध्यान भी तो चाहिये , सुनने का ध्वनि शुद्ध कान भी तो चाहिए ।
श्रद्धा से इसको बुलाने वाला चाहिये , ज्योत से ज्योत को मिलाने वाला चाहिए ।
कौन कहता है मां ...........
सच्ची ज्योत रिझती ना झुठ ना पाखंड से , प्रेम से बुलाओ , ना पुकारो घमंड रे से ,
इसे सरोकार नही जोर ना ही शोर से , ये तो बंध जाती हे रे आस्था की डोर से ।
बोलो जिस भाषा में ज्ञान भी चाहिये , आत्मा को इसकी पहचान भी चाहिये ।
श्रद्धा से इसको बुलाने वाला चाहिये ।
कौन कहता है ..........
ज्योत हे मां , अहसास होगा जिसको , समझेगा वो ही विश्वास होगा जिसको ।
पहले ज्योत अपने तराजु में हे तोलती , उतरे जो पूरे , जोत उनके संग बोलती ।
र्निदोष भक्ति की तारे जरा जोडिये , बाकी क्या कहना है उस पे छोडिये ।
श्रद्धा से इसको बुलाने वाला चाहिये ।
कौन कहता है .............
बोलो शेरा बाली माता कि जय .जय माता दी ,जय माता दी
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