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पहाड़ धरती का ऐसा क्षेत्र है,

                           पहाड़ धरती का ऐसा क्षेत्र है,








पहाड़ धरती का ऐसा क्षेत्र है, जो अपने चारों और की जमीन की अपेक्षा बहुत ऊंचा होता है l धरती पर पहाड़ों की अनेक श्रृंखलाएं हैं l क्या आप जानते है कि ये बड़े-बड़े पहाड़ों की श्रृंखलाएं (Ranges) कैसे बनी हैं l
     भूवैज्ञानिकों ने पहाड़ों के बनने का बड़ा व्यापक अध्ययन किया है l इन अध्ययनों से वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पहाड़ों का जन्म एक पहाड़ के रूप में नहीं होता, बल्कि इनका निर्माण श्रृंखला के रूप में होता है l पहाड़ों की श्रृंखला जमीन पर अनेकों छोटी-बड़ी पहाड़ियों के साथ बहुत दूर तक फैली रहती हैं l पहाड़ों की उत्पति का सही ढंग से अध्ययन करने के लिए भूवैज्ञानिकों ने इनको चार श्रेणियों में बांटा है l अलग-अलग प्रकार के पहाड़ों का निर्माण अलग-अलग प्रकार से हुआ है, लेकिन सभी पहाड़ों की उत्पति पृथ्वी की सतह में भीषण उत्थल-पुथल के कारण ही हुई है l पृथ्वी की सतह में ये महान परिवर्तन लाखों-करोड़ों वर्ष पहले हुए l चारों प्रकार के पहाड़ों के निर्माण को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है l
     पहले प्रकार के पहाड़ों को ज्वालामुखी पहाड़ (VOLCANIC MOUNTAINS) कहते हैं, इन पहाड़ों का निर्माण लावा, राख v अंगारों से होता है l पृथ्वी की आतंरिक हलचलों से पृथ्वी की सतह काफी फट जाती है और धरती के अन्दर के पदार्थ लावे के रूप में बाहर निकलने लगते हैं l ज्वालामुखी पहाड़ शंकु (Cone) के आकार के होते हैं और उनके ऊपरी सिरे पर बहुत बड़ा गड्ढा या छेड़ होता है l इस प्रकार बने पर्वतों में इटली का वेसुवियस (Vesuvias), जापान का फुजियामा (Fujiyama), अमेरिका का हुड (Hood) और रेनियर (Ranier) ज्वालामुखी श्रृंखलाएं मुख्य हैं l
     दुसरे प्रकार के पहाड़ों को परतदार पर्वत (Folded Mountains)कहते हैं l ये पहाड़ चट्टानों की कई परतों से बने होते हैं l इन परतों का निर्माण पृथ्वी के अन्दर भयानक सिकुड़न और दबाव के कारण होता है l पृथ्वी की सतह के निचे कुछ क्षेत्र गतिशील होते हैं, जो अधिक बल और सिकुड़न के कारण ऊपर उठ जाते हैं और पहाड़ों का रूप ले लेते हैं l आल्प्स (Alps) पर्वत श्रृंखला इसी प्रकार बनी है l
     तीसरे प्रकार के पहाड़ों का रूप गुम्बद जैसा होता है l इसलिए इन्हें गुम्बद पर्वत (Done Mountains) कहते हैं l जो पिघला हुआ लावा पृथ्वी के अन्दर से बहुत अधिक दबाव से बाहर आता है, तो ठंडा होने पर यह गुम्बद के रूप में जमा होता जाता है और गुम्बद पर्वत का निर्माण होता रहता है l इस प्रकार के गुम्बद पर्वतों का उदाहरण दक्षिण डकोटा (Dakota) की ब्लैक हिल हैं l
     चौथे प्रकार के पर्वतों को शिला पर्वत (Block Mountains) कहते हैं l इन पर्वतों का निर्माण पृथ्वी की परतों में दोष आने के कारण होता है l कभी-कभी पृथ्वी के अन्दर ऐसी भयानक हलचल होती है कि परिणामस्वरूप धरती के अन्दर उपस्थित पुरे का पूरा शिलाखंड उलटकर पृथ्वी पर परवर के रूप में खड़ा हो जाता है तथा इससे ब्लाक परवर का निर्माण हो जाता है l कैलिफोर्निया में ‘ सिएरा नेबाडा ’ पर्वत श्रृंखला (Sierna Nevada Range) एक ब्लाक पर्वत का उदाहरण है l जिसकी एक ही शिला 640 कि. मी. (400 मील) लम्बी v 128 कि. मी. (80 मील) चौड़ी है l
     पहाड़ों के बनने में लाखों वर्ष लग जाते हैं l पहाड़ों की ऊपर उठने की दर प्रतिवर्ष कुछ मिलीमीटर होती है l

     समय के साथ-साथ पहाड़ों का विकाश भी होता रहता है l वर्षा, तूफान, पिघली हुई बर्फ का बहता हुआ पानी, पर्वतों की मिट्टी और चट्टानों का थोड़ा-थोड़ा हिस्सा नष्ट करते रहते हैं l इस क्रिया के फलस्वरूप एक समय ऐसा आता है, जब बड़े-बड़े पहाड़ भी छोटी-छोटी पहाड़ियों या मेदानों में बदल जाते हैं l ............ 
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