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कुंडली में सष्टम भाव

 ६ सष्टम भाव / छठा भाव :

  कुंडली के छठे घर को भारतीय वैदिक ज्योतिष में अरि भाव अथवा शत्रु भाव कहा जाता है तथा कुंडली के इस घर के अध्ययन से यह पता चल सकता है कि कुंडली धारक अपने जीवन काल में किस प्रकार के शत्रुओं तथा प्रतिद्वंदियों का सामना करेगा तथा कुंडली धारक के शत्रु अथवा प्रतिद्वंदी किस हद तक उसे परेशान कर पाएंगे। कुंडली के छठे घर के बलवान होने से तथा किसी विशेष शुभ ग्रह के प्रभाव में होने से कुंडली धारक अपने जीवन में अधिकतर समय अपने शत्रुओं तथा प्रतिद्वंदियों पर आसानी से विजय प्राप्त कर लेता है तथा उसके शत्रु अथवा प्रतिद्वंदी उसे कोई विशेष नुकसान पहुंचाने में आम तौर पर सक्षम नहीं होते जबकि कुंडली के छठे घर के बलहीन होने से अथवा किसी बुरे ग्रह के प्रभाव में होने से कुंडली धारक अपने जीवन में बार-बार शत्रुओं तथा प्रतिद्वंदियों के द्वारा नुकसान उठाता है तथा ऐसे व्यक्ति के शत्रु आम तौर पर बहुत ताकतवर होते हैं।

 कुंडली का छठा घर कुंडली धारक के जीवन काल में आने वाले झगड़ों, विवादों, मुकद्दमों तथा इनसे होने वाली लाभ-हानि के बारे में भी बताता है। इसके अतिरिक्त कुंडली के इस घर से कुंडली धारक के जीवन में आने वाली बीमारियों तथा इन बीमारियों पर होने वाले खर्च का भी पता चलता है। कुंडली के छ्ठे घर से कुंडली धारक की मज़बूत या कमज़ोर वित्तिय स्थिति का भी पता चलता है। कुंडली में छठे घर के बलहीन होने से अथवा किसी विशेष बुरे ग्रह के प्रभाव में होने से कुंडली धारक को अपने जीवन काल में कई बार वित्तिय संकटों का सामना करना पड़ सकता है तथा उसे अपने जीवन काल में कई बार कर्ज लेना पड़ सकता है जिसे आम तौर पर वह समय पर चुकता करने में सक्षम नहीं हो पाता तथा इस कारण उसे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

 कुंडली का छठा घर शरीर के अंगों में पेट के निचले हिस्से को, आँतों को तथा उनकी कार्यप्रणाली को, गुर्दों तथा आस-पास के कुछ और अंगों को दर्शाता है। कुंडली के इस घर पर किन्ही विशेष बुरे ग्रहों का प्रभाव कुंडली धारक को कबज़, दस्त, कमज़ोर पाचन-शक्ति के कारण होने वाली बिमारियों, रक्त-यूरिया, पेट में गैस-जलन जैसी समस्याओं, गुर्दों की बिमारीयों तथा ऐसी ही कुछ अन्य बिमारियों से पीड़ित कर सकता है।


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