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रिटायरमेंट का कोष बनाने के 3 आसान टिप्स



वो दिन चले गए जब रिटायरमेंट 58-60 साल की उम्र में हुआ करता था और लोग उसके लिए मानसिक तौर पर तैयार रहा करते थे। जैसे कम्प्यूटर की जगह आईपैड और टैबलेट आ गए, टैलीफोन की जगह मोबाइल फोन और मल्टी सिम फोन आ गए और नोटबुक आ गई उसी तरह रिटायरमेंट के लिए भी युवाओं की सोच बदल गई है। आजकल के युवा सबकुछ जल्दी और बेहतर स्थिति में चाहते हैं। इसलिए वो रिटायरमेंट भी 45-50 साल की उम्र में ले लेना चाहते हैं। जल्दी रिटायरमेंट लेकर वो अपनी मर्जी से कुछ करना चाहते हैं और अपनी पूंजी का इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन ये सब योजनाएं तभी पूरी हो सकती हैं अगर उनके पास खर्च करने के लिए पर्याप्त रकम हो। इसलिए रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी हो जाता है और इसे किसी भी हालत में टाला नहीं जा सकता है।

ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के लिए समुचित प्लानिंग करके नहीं चलते हैं जिससे वो रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त पैसा जोड़ने में असफल रहते हैं। अगर आप रिटायरमेंट के लिए अच्छी धनराशि जोड़ना चाहते हैं तो आपको अपने जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश का लक्ष्य तयकरके पैसा बचाना शुरु कर देना चाहिए। यानि आपको जल्दी निवेश शुरु करना चाहिए अपने पोर्टफोलियो को लगातार विश्लेषण करते रहना चाहिए।

यहां पर कुछ आसान सुझाव दिए गए हैं जिन्हें अगर आप गंभीरता से अपनाएं तो ये आपको रिटायरमेंट के लिए कोष इक्ट्ठा करने में मददगार साबित होंगे और आपको परेशानियों से बचाने में सहायक होंगे।

1. जल्दी शुरुआत करें: सभी लोग इसके बारे में कहते हैं लेकिन यहां ये ज्यादा असरदार कारक के साथ बताया जा रहा है जो है-कंपाउंडिंग की ताकत

कंपाउंडिंग की ताकत क्या है?
अगर आप 100 रुपये सालाना बचाते हैं और इस पर सालाना 10 फीसदी का ब्याज मिलता है तो साल के अंत में आपके पास 110 रुपये होंगे। कंपाउंड इंटरेस्ट की ताकत के चलते आपको अगले साल 110 रुपये का 10 फीसदी ब्याज मिलेगा जो बढ़कर 121 रुपये हो जाएगा। इसके बाद आपको 121 रुपये के ऊपर 10 फीसदी ब्याज मिलेगा और इसी तरह ये चक्र चलता रहेगा। इस तरह आपकी बचत धीरे धीरे बढ़ती चली जाती है।

तो अगर आप 10 फीसदी सालाना कंपाउंडिंग ब्याज के साथ निवेश करते हैं तो नियम 72 की वजह से आपकी बचत 7.2 साल में दोगुनी हो जाएगी। इसी तरह अगर आप बड़ी रकम को लें जैसे 10 लाख रुपये तो 7.2 साल में ये बढ़कर 210 लाख रुपये हो जाएंगे। याद रखें कि आपको लगातार निवेश करना है। तभी आपकी रकम बढ़ेगी जैसे कि अगर आपको 60 साल की उम्र में रिटायर होना है तो आपकी निवेश की हुई रकम का करीब 6 गुना हो जाना चाहिए। ये कंपाउंडिंग की ताकत कहलाता है। लंबी अवधि के लिए निवेश किया हुआ पैसा ज्यादा गति से बढ़ता है। इसलिए अगर आप जल्दी निवेश करना शुरु करते हैं तो कंपाउंडिंग की ताकत के चलते आपका निवेश किया हुआ पैसा दोगुना, तिगुना या चार गुना बढ़ोतरी हो सकती है।

2. बचाने के साथ साथ निवेश भी करें: पैसे बचाने से ज्यादा महत्वपूर्ण पैसे निवेश करना भी है। निवेश से आपका पैसा बढेगा भी और आप महंगाई का भी सामना कर पाएंगे। भारत में पैसे बचाने की दर विश्व के अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा है और इसका सही उपयोग होना चाहिए। ज्यादातर गृहिणियां पैसे बचाती हैं लेकिन इसे निवेश नहीं करती जिससे महंगाई इस पैसे को खत्म करती है और आप इसे बढ़ा नहीं पाते।

इसलिए अगर आपके पास घर में या बैंक खाते या फिक्सड डिपॉजिट में पैसा पड़ा है तो इसे महंगाई के हमले से बचाने और इसकी वैल्यू कम होने से बचाने के लिए निवेश करें। अपने जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर बाजार में निवेश करें। जैसे कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और कितने समय के लिए निवेश कर सकते हैं। याद रखें कि बढ़ते समय के साथ जोखिम कम होता जाता है क्योंकि ये बंट जाता है।

3. अपने लक्ष्यों के मुताबिक पोर्टफोलियो का विश्लेषण करें: अपने निवेश की शुरुआत करते समय लक्ष्यों को निर्धारित करें और समय समय पर इसकी जांच करते रहें। इससे आपको पता चलता रहेगा कि आप अपने लक्ष्य के कितने करीब हैं।

तो इस तरह आप निवेश के आधारभूत सिद्धांतों का पालन करके आसानी से अपना रिटायरमेंट कोष इक्ट्ठा कर सकते हैं। आपका निवेश आपके जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए। इसके साथ अलग अलग ऐसेट क्लास जैसे म्यूचुअल फंड, गोल्ड, रियल एस्टेट, पीपीएफ, बैंक फिक्सड डिपॉजिट और यहां तच की डेरिवेटिव और ऑप्शन में निवेश बंटा होना चाहिए। अलग अलग ऐसेट क्लास में रखने से आपको जब पूंजी की जरूरत होगी आप इसे निकाल सकते हैं। उम्मीद है कि ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखकर आप सुरक्षित भविष्य की नींव रख सकते हैं।

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